लग्न हा आयुष्यातील एक आनंदाचा (?) क्षण ( क्षणभंगुर), आसाच एक क्षण माझ्या मित्राच्या आयुष्यात फार लवकरच येणार आहे .... लवकर म्हणजे पुढील महिन्याच्या ३० तारखेला ..... त्याचा आनंद त्याला शब्दात आणि वाक्यात वार्तवता येत नव्हता , म्हणुन मी माझ्या शब्दात आणि काव्यात वर्तवला आहे ..... देव विशाल च्या आयुष्यात शान्ति देओ हीच प्रार्थना ..........
विशाल करने जा रहा है शादी ,
मानू खुशी , या रोकू उसकी बर्बादी ..........
शादी के बाद जो हालत होगी उसकी
तडपेगा, तरसेगा पर नसीब नही होगी व्हिस्की ........
गया था गोवा उठाया उसने ग्लास फेनी का
रख दिया बिना पिए, बोला चेहरा नजर आया "would be" शेरनी का ................
लगाता था कश पे कश और दम पे दम
आज थर्रा उठता है दिल उसका देख के प्याला रम ....................
शादी के पहले की गीन रहा है दिन
लाओ उसको इंसानों में पिला के दो गिलास जिन ...............
शादी के खर्चे से हो रहा जेब से कड़का
नही करता शादी बच ता खर्चा तो रोज़ पि सकता था वोडका ...........
एक बात है मेरे Dear
शादी है वो बियर मेरे भाय
जो पिए वो पचताये, ना पिए वो प्यासा रह जाय ....................
आपला,
(कळजीवाहु) उपेन्द्र
Monday, October 27, 2008
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